सचमुच में कमाल है अपनी यूपी पुलिस. कभी बिना गोली के मुंह से गोलियां चलाने लगती है, तो कभी गोली होते हुए भी बंदूक चलाना भूल जाती है. पर इस बार तो सचमुच हद ही कर दी. यूपी पुलिस की ट्रेनिंग चल रही थी कि अगर कभी कहीं दंगा हो जाए या भीड़ उग्र हो जाए तो उससे कैसे निपटना है. ट्रेनिंग के लिए बाकायदा पुलिस के साथ-साथ भीड़ भी जुटाई गई. अब ट्रेनिंग शुरू होती है. पुलिस से कहा जाता है कि वो घोड़े पर बैठेंगे और उन्हीं घोड़े को दौड़ा कर दंगाइयों को पीछे खदेड़ेंगे. अब आगे जो हुआ वो हैरान करने वाला था.
कभी ठांय ठांय, तो कभी टग बग टग बग
क्या गोली-क्या बंदूक, क्या गाड़ी क्या घोड़ा. सब बेकार की बातें हैं. सब बेकाम की चीजें हैं. काम के तो बस ये हैं. गोली बंदूक में ना भी हो तो मुंह से ठांय-ठांय कर दें. घोड़ा-गाड़ी ना हो तो खुद ही टगबग-टगबग कर लें. सच में कमाल की है अपनी यूपी पुलिस. और कुछ-कुछ बिहार पुलिस भी. पड़ोसी होने का असर तो होना चाहिए ना कुछ.
यूपी पुलिस के हाल पर रोना आया
सच में रोना आ रहा है. क्या हालत बना दी है अपनी पुलिस की. ऐसी गरीबी ऐसी बेचारगी ऐसी बेबसी. हद है. कानून के दुश्मन तो इनकी इस हालत पर कानून से खौफ खाने की बजाए कानून पर चुटकुला ही बनाना शुरू कर देंगे. मुंह से ठांय-ठांय का नमूना क्या कम था जो अब टगबग-टगबग पेश कर रहे हैं. बेचारे ये भी क्या करें. हुक्म ना मानने पर साहब मुर्गा बना दें उससे अच्छा है कि काठ का घोड़ा ही बन जाएं. टगबग-टगबग ही तो करना है. वाकई कमाल है अपनी यूपी पुलिस
दंगाइयों से निपटने की ये कैसी तैयारी
अब गुदगुदा देने वाली कहिए या रुला देने वाली पर ऐसी तस्वीरें ही फिरोज़ाबाद जिले की हैं. पुलिस को ट्रेनिंग दी जा रही थी. सिखाया जा रहा था कि अगर शहर में दंगा हो जाए तो उस हालात में पुलिस वाले दंगाइयों से कैसे निपटेंगे. इसके बाद अलग-अलग तरीके बताए गए. यहां तक तो सब कुछ ठीक था.
ऐसा पहले कभी नहीं देखा होगा
पर फिर तभी जैसे ही एक नायाब तरीका सामने आया. जिसे देख कमबख्त कैमरा भी ठिठक गया. अब क्या करें कैमरे ने भी ऐसी घुड़सवारी कहां देखी थी पहले. पांच पुलिस वाले काले सफेद घोड़ों पर सवार होकर दंगाईयों की तरफ बढ़ रहे थे. अब इस पर मत जाइए कि घोड़े किस नस्ल के थे, या कितने तगड़े थे.
कमाल की घुड़सवारी
पुलिस वाले कभी ऊपर जाते कभी नीचे आते. फिर छलांगे भी मारते. इसके बाद ये दंगाई के इलाके में घुस कर उन्हें खदेड़ भी देते. योगी जी ने ऐसे ही नहीं बोला था कि यूपी पुलिस को ऐसा बना देंगे कि न्यूयार्क पुलिस भी रश्क करेगी. और सच में उन्होंने कर दिखाया. न्यूयार्क पुलिस की भी क्या मजाल जो ऐसी घुड़सवारी कर ले.
बिना घोड़ों के घुड़सवारी
फिरोज़ाबाद के एसपी साहब तो शायद इस घोड़ा-कला के पुराने माहिर दिखते हैं. यूपी सरकार को उनकी इस खास काबलियत का भरपूर फायदा उठाना चाहिए. जहां बिना घोड़ों के ही घुड़सवारी करा दी जाए. ये काम केवल यूपी पुलिस ही कर सकती है. देश भर में घुमा-घुमाकर उन्हें ऐसे घोड़े और घुड़सवार तैयार करने के घोड़ा विभाग का कप्तान बना देना चाहिए. पुलिस पेट्रोलिंग और पेट्रोल दोनों का खर्चा बच जाएगा. फिरोजाबाद पुलिस की इस हरकत से पूरा महकमा अब मजाक बनकर रह गया है.