प्रदर्शनों के बीच अनेक शहरों में नागरिकता कानून के समर्थन में आए लोग

प्रदर्शनों के बीच अनेक शहरों में नागरिकता कानून के समर्थन में आए लोग


नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देशभर में हो रहे प्रदर्शन के बीच अब इसके समर्थन में भी लोग सड़कों पर उतर आए हैं.





amid protest people came in support of CAA and NRC in many cities








नई दिल्ली: नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देशभर में हो रहे प्रदर्शन के बीच अब इसके समर्थन में भी लोग सड़कों पर उतर आए हैं. इस कानून के समर्थन में रैली महाराष्ट्र के नागपुर, मुंबई और बिहार के मुजफ्फरपुर में निकाली गई है. नागपुर में इस रैली का आयोजन लोक अधिकार मंच, बीजेपी, आरएसएस और अन्य पार्टियों द्वारा किया गया.




इस कानून के समर्थन में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून किसी भी भारतीय मुस्लिमों के खिलाफ नहीं है. उन्होंने कहा कि इस कानून से सिर्फ उत्पीड़न के शिकार हुए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यकों को नागरिकता दी जाएगी. उन्होंने मुस्लिम लोगों से कांग्रेस के जूठ फैलाने वाले इस अभियान से बचने की सलाह दी. उन्होंने मुस्लिमों से कहा कि कांग्रेस पार्टी आपको सिर्फ वोट मशीन के तौर पर देखती है.


 

 




केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, ''सीएए किसी भारतीय मुस्लिम के खिलाफ नहीं है. यह सिर्फ पड़ोसी देशों के उत्पीड़न का शिकार हुए अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का कानून है. मैं अपने मुस्लिम भाइयों को कांग्रेस के झूठे अभियान की सच्चाई जानने की अपील करता हूं. यह पार्टी सिर्फ आपको वोट मशीन के तौर पर देखती है''




नागपुर के अलावा मुंबई में भी लोगों ने इस कानून के समर्थन में रैली निकाली है. यहां के मीरारोड स्टेशन के बाहर लोगों ने नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी का समर्थन किया. महाराष्ट्र के अलावा बिहार में भी लोगों ने इस कानून का समर्थन किया है. यहां के मुजफ्फरपुर जिले में शनिवार को दिनभर नागरिकता कानून के विरोध में हो रहे हंगामे के बाद रविवार को इस कानून के समर्थन में लोग सड़कों पर आए. इस दौरान लोगों ने जमकर आतिशबाजी की और एक दूसरे को रंग-गुलाल लगाया.




हालांकि, बता दें कि देश के अनेक भागों में नागरिकता संशोध कानून के खिलाफ प्रदर्शन हो ही रहे हैं. शनिवार को इस कानून के खिलाफ बिहार में मुख्य विपक्षी पार्टी आरजेडी ने बिहार बंद का आयोजन किया था. यह बंद कुल मिलाकर सफल रहा और कहीं से कोई बड़ी हिंसा की खबर नहीं आई. वहीं, इस विरोध-प्रदर्शन में अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है. अकेले उत्तर प्रदेश में 15 लोगों की मौत हो चुकी है. कर्नाटक में भी इस कानून के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन में शामिल दो लोगों की मौत हो गई है. केरल से भी एक व्यक्ति के मौत की खबर है.