मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लंबे समय से अटके उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा अधिकरण का कार्यालय लखनऊ और इलाहाबाद में स्थापित करने के संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अधिकरण के अध्यक्ष और सदस्य दोनों कार्यालयों में बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के अशासकीय सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों और बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों के सेवा विवादों के निस्तारण करेंगे। गौरतलब है कि विधानमंडल के मानसून सत्र में ही अधिकरण की स्थापना लखनऊ में करने का प्रस्ताव पारित किया गया था।
इसके बाद प्रयागराज के वकीलों ने इसका विरोध करते हुए आंदोलन किया। इसके बाद मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचने पर सरकार ने लखनऊ और प्रयागराज दोनों जगह अधिकरण का कार्यालय खोलने का निर्णय किया है। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि रेरा की तरह अधिकरण का कार्यालय लखनऊ और प्रयागराज में संचालित होगा।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार के जिलों से जुड़े शिक्षकों व शिक्षणेतर कर्मचारियों के मामलों की सुनवाई प्रयागराज कार्यालय में होगी। वहीं उच्च न्यायालय की लखनऊ बैंच के क्षेत्राधिकार के जिलों के शिक्षकों व कर्मचारियों की सुनवाई अधिकरण के लखनऊ कार्यालय में होगी। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि संशोधित प्रस्ताव को अब कैबिनेट में रखा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद आवश्यक होने पर बजट सत्र में विधानमंडल के दोनों सदनों में इसे पेश किया जाएगा।
इन मामलों की होगी सुनवाई
शिक्षा सेवा अधिकरण में अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक शिक्षण संस्थानों, माध्यमिक संस्कृत शिक्षण संस्थानों, अशासकीय सहायता प्राप्त प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों और उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में अध्यापकों तथा कर्मचारियों के सेवा संबंधी विवादों का निस्तारण किया जाएगा।
ऐसा होगा अधिकरण
अधिकरण में एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष और छह सदस्य होंगे। एक उपाध्यक्ष न्यायिक सेवा से जबकि दूसरे प्रशासनिक सेवा से होंगे। छह सदस्यों में तीन न्यायिक सेवा और तीन प्रशासनिक सेवा से होंगे। अध्यक्ष की अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष और सदस्यों की 62 वर्ष होगी। शिक्षक या कर्मचारी अधिकरण के निर्णय से संतुष्ट नहीं होने पर 90 दिन में उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर सकेंगे।